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Astrology and Grahdarpan

(ज्योतिष विज्ञान की प्रासंगिकता)

ज्योतिष एक प्रत्यक्ष शास्त्र है, वेदांगों में ज्योतिष का महत्वपूर्ण स्थान है| महर्षि पाणिनि ने ज्योतिष को वेद पुरुष का नेत्र कहा है- जयोतिषामयनं चक्षुः जिस प्रकार से मनुष्य बिन चक्षु इन्द्रिय के किसी विषय वस्तु को देखने मे असमर्थ होता है ठीक उसी प्रकार वेद शास्त्र में वेद शास्त्र विहित कर्मों को जानने के लिए ज्योतिष का अनन्यतम महत्व है|

एक योग्य ज्योतिषी कुंडली को देखकर भूत वर्तमान और भविष्य का कथन कर सकता है। ज्योतिष में शनि राहु केतु से गत जीवन का विचार किया जाता है, विशेष रूप से गुरु की प्रधानता मानी जाती है, क्योंकि जीव की संख्या गुरु से ही दी गयी है। गत जीवन के बारे में महर्षि पाराशर ने द्रेषकाण से जानने की विधि बतायी है।सूर्य और चन्द्रमा से भी पीछे के जीवन की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। चन्द्र शुक्र को चन्द्र लोक या पितृ लोक माना गया है। सूर्य और मंगल पृथ्वी लोक का निर्माण करते है। ऋषियों का कथन है कि गुरु अगर छ: आठ या बारहवें भाव में है तो अगले जन्म का रूप बहुत ही अच्छा होता है। पांचवे भाव और शनि से पिछला जीवन देखा जाता है, पांचवे भाव में सूर्य हो तो पिता का चन्द्र हो तो माता का मंगल हो तो भाई का शुक्र हो तो स्त्री का और शनि के साथ राहु हो तो सूर्य के श्राप से जीवन में दोष होता है। इस हेतु जाप और दान करना श्रेष्ठ माना जाता है।

कर्मफ़ल अवश्य प्राप्त होता है। अत: जो हम वर्तमान में कर रहे है वह आगे जरूर प्राप्त होता है इसलिये सात्विक तरीके से अपने कार्यों को करने से आगे का कर्म फ़ल अच्छा मिलने की बात बतायी गयी है।

अतः समय समय पर ज्योतिषी के परामर्श से सभी कार्यों में आशातीत सफलता प्राप्त करने के साथ ही साथ आने वाली परिस्थितियों के अनुसार भावी निर्णय और उससे होने वाले परिणाम को सुनिश्चित किया जा सकता है। ज्योतिष एक बहुत ही परिपूर्ण और सुनियोजित विज्ञान है जो मनुष्य के ग्रहों की स्थिति के अनुसार उसके जीवन के हर पहलू के बारे में सटीक विचार करने में पूर्णतयः समर्थ है बस आवश्यकता होती है तो वह है, ग्रहों की सटीक गणना कर पाने में समर्थ व्यक्ति की ।

Effect of Planets

(ग्रहों का प्रभाव)

Life and Grah

हमारी भारतीय ऋषि परम्परा ने पूर्णरूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखा है| जिन ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व निर्देश दिया है की सूर्य और चन्द्र ग्रहण के समय किसी प्रकार का अन्न अथवा आहार ग्रहण न किया जाय यहाँ तक की पानी पीना भी वर्जित है उस दिन उपवास रखने का निर्देश है| क्यों की हमारे ऋषियों को आज के वैज्ञानिकों से बहुत पहले ही इनके प्रभाव और उपचार का ज्ञान हो चुका था|

निःसंदेह रूप से विभिन्न ग्रहों का मनुष्य जीवन पर प्रभाव होता है| हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले प्रमुख सात ग्रह और उनका जीवन में प्रभाव निम्नलिखित है-

  • सूर्य- यह प्राण तत्व का अधिष्ठाता है| यह हमारे जीवन में क्रियाशक्ति, प्राणशक्ति के रूप में परिलक्षित होता है|

  • चन्द्रमा- यह मन का अधिष्ठाता है| यह हमारे चिंतन प्रक्रिया का परिलक्षण प्रभावित करता है|

  • मंगल- यह इच्छा, वासना काम से संबंधित है|

  • बुध- यह मन की विविध क्षमताओं से सूक्ष्म रूप से जुडा हुआ है|

  • गुरु- यह अध्यात्मिक शक्ति, संवेदना, भावना तथा श्रद्धा को प्रभावित करता है|

  • शुक्र- शुक्र अंतर्मुखी प्रवित्तियों को जन्म देता है|

  • शनि- यह प्रकृति का अधिष्ठाता तथा पृथ्वी तत्व प्रधान ग्रह है| इन्द्रिय गम्य सभी पदार्थ इसके अंतर्गत आते हैं|

Few words to You

नमस्कार ! वेबसाइट पर पधारने के लिए हृदय से धन्यवाद , इस वेबसाइट का निर्माण का मुख्य उद्देश्य, ग्रहदर्पण के माध्यम से जन सामान्य तक एस्ट्रोलॉजी विज्ञान के बारे में जागरूकता एवं इसकी हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उपयोगिता की सार्थकता सिद्ध करने के लिए हुआ है| आप इसकी विभिन्न सुविधाओं का लाभ लें और अपने जीवन को खुशहाली के विभिन्न रंगों से सजायें |
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